विज्ञान: कुछ परिभाषाएँ, कुछ विचार........

कई लोगों के दिलो-दिमाग में आधुनिक विज्ञान के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण है। वे आधुनिक विज्ञान को उपनिवेशवादी सृजन मानकर सीधे-सीधे नकार देते हैं या फिर अपनी प्राचीन परम्पराओं में विज्ञान को ढूंढ़ते हैं। वी.वी. रमण का मत है कि आधुनिक विज्ञान न तो पश्चिमी है और न ही उपनिवेशवादी, बल्कि यह तो ऐसा मानव उद्यम है जो भौतिक संसार के हर पहलू को उद्घाटित करना चाहता है।
आधुनिक  विज्ञान  का  इतिहास  करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है। भौतिक और जैविक दुनिया के बारे में मनुष्यों का ज्ञान बढ़ाने में इसकी अहम भूमिका रही है। इसीलिए मानव सभ्यता को विज्ञान ने व्यापक रूप से प्रभावित किया है। विज्ञान के बीज विश्व की कई संस्कृतियों, जैसे यूनान, भारतीय, चीनी और इस्लाम में भी बोए गए लेकिन उनका सबसे पहले अंकुरण पश्चिमी युरोप में हुआ और फिर वहीं से दुनिया के अन्य हिस्सों में उसका विस्तार हुआ।

दुर्भाग्य से 16वीं से 19वीं सदी के दौरान साम्राज्यवादी युरोप ने कई देशों और वहाँ के लोगों को गुलाम बना लिया। हालाँकि, पिछले करीब डेढ़ सौ सालों में विज्ञान पश्चिमी से गैर-पश्चिमी देशों में भी फैला है, लेकिन पश्चिमी उपनिवेशवाद के खिलाफ इतिहासजन्य आक्रोश की वजह से वहाँ के कई लोगों के दिलो-दिमाग में आधुनिक विज्ञान के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा हुआ है। इस वजह से वे आधुनिक विज्ञान को उपनिवेशवादी सृजन मानकर सीधे-सीधे नकार देते हैं या फिर अपनी प्राचीन परम्पराओं में विज्ञान को ढूंढ़ते हैं। ये प्रतिक्रियाएँ हालाँकि स्वाभाविक हैं, लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि वाकई में विज्ञान क्या है, इसे वे नहीं जानते। आधुनिक विज्ञान न तो पश्चिमी है न ही उपनिवेशवादी, बल्कि यह तो ऐसा मानव उद्यम है जो भौतिक संसार के हर पहलू को उद्घाटित करना चाहता है।
अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने बहुत ही अहम स्थान बना लिया है और मौजूदा सदी में उसके सामने और भी कई महती ज़िम्मेदारियाँ हैं। इसी के मद्देनज़र विज्ञान को केवल तकनीकी क्षेत्र मानने की बजाय मानव उद्यम और मानवीय भावनाओं की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ही माना जाना चाहिए। यह नज़रिया भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पनप रही भावी वैज्ञानिक पीढ़ी के लिए मददगार होगा।

विज्ञान: अर्थ व उत्पत्ति
हिन्दी व संस्कृत में प्रचलित विज्ञान शब्द के लिए अँग्रेज़ी भाषा में ‘साइंस’ का इस्तेमाल किया जाता है। अँग्रेज़ी में इस शब्द को प्रचलन में आए बहुत लम्बा अरसा नहीं हुआ है। मध्ययुगीन अँग्रेज़ी में इसे सिंज़, सायेंस, सिएंस इत्यादि के रूप में लिखा जाता था जिसका अर्थ होता था ‘ज्ञान’। जर्मन और डच भाषाएँ भी उसी भाषाई परिवार से नाता रखती हैं जिससे अँग्रेज़ी रखती है। इन दोनों भाषाओं में विसेंशाफ्ट और वेटेंशाप शब्दों का प्रयोग किया गया है जो क्रिया ‘जानना’ का ही संज्ञा रूप है। अँग्रेज़ी में साइंस शब्द की उत्पत्ति लैटिन में प्रचलित शब्द ‘साइंटिया’ से मानी जा सकती है जिसका अर्थ है ज्ञान।

क्लासिकी दुनिया में ‘वैज्ञानिक पड़ताल’ का अर्थ ‘प्राकृतिक चीज़ों’ के अध्ययन से लगाया जाता था। विज्ञान की इसी व्याख्या की वजह से इसमें ज्ञान की सभी शाखाओं को सम्मिलित किया जाने लगा। लेकिन इससे धीरे-धीरे यह सोच भी बनने लगी कि जो विज्ञान का हिस्सा नहीं है, वह बहुत ही निम्न स्तरीय या महत्वहीन चीज़ है। विज्ञान और धर्म के बीच संघर्ष और विवाद की जड़ में यही सोच रही है। उल्लेखनीय है कि संस्कृत में साइंस के लिए इस्तेमाल किए गए ‘विज्ञान’ शब्द का अर्थ विवेक व समझदारी से लगाया जाता है।

16वीं व 17वीं सदी में आधुनिक विज्ञान के विकास के साथ ही उसके लिए ‘प्राकृतिक दर्शन शास्त्र’ शब्द का प्रयोग किया जाने लगा था। दूसरे शब्दों में कहें तो उस वक्त विज्ञान का मतलब था प्रकृति का दर्शन या प्रकृति की व्यवस्थित ढंग से खोज। आधुनिक विज्ञान के इतिहास में मील का पत्थर माने जाने वाले आइज़ेक न्यूटन के शोध-पत्र  का  भी  शीर्षक  था, ‘मैथेमेटिकल प्रिंसिपल्स ऑफ नेचुरल फिलॉसफी’। इसमें ‘फिलॉसफी’ शब्द दो ग्रीक शब्दों - फिलोज़ यानी प्रेम और सोफ़िया यानी ज्ञान या विवेक से लिया गया है। ‘साइंस’ की तुलना में ‘नेचुरल फिलॉसफी’ कहीं अधिक विवरणपूर्ण है क्योंकि वैज्ञानिक खोज के मामले में जितनी महत्वपूर्ण ज्ञान की पिपासा है, उतना ही महत्वपूर्ण ज्ञान के प्रति अनुराग भी है।

प्राकृतिक पदार्थों के अध्ययन के लिए कुछ प्रयोग भी किये जाते हैं और उनसे निष्कर्ष निकलने की कोशिश होती है। जैसे लेवोजिए ने प्रयोगों के आधार पर बताया कि जलने, जंग लगने या प्राणियों द्वारा श्वसन के दौरान ऑक्सीजन पदार्थ के साथ जुड़ती है।

18वीं सदी में लेखकों ने किसी भी क्षेत्र के व्यवस्थित अध्ययन के लिए साइंस शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। लेकिन 1831 में ब्रिटिश एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस की स्थापना के बाद यह शब्द धीरे-धीरे उस रूप में प्रयुक्त होने लगा जैसे आज होता है।
इसके कुछ ही समय बाद विज्ञान के ब्रिटिश दार्शनिक विलियम वेवेल ने महसूस किया कि विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए कोई शब्द नहीं है और फिर उन्होंने ऐसे लोगों के लिए साइंटिस्ट (वैज्ञानिक) शब्द पेश किया। विज्ञान  का  विभिन्न  शाखाओं  में वर्गीकरण और विशेषज्ञता की ज़रूरत भी 19वीं सदी में ही समझी गई।

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